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मेहरासर चाचेरा के सैकंडरी स्कूल के छात्रों का प्रोजेक्ट राष्ट्रीयस्तर पर चयनित, तीन सप्ताह तक फल-सब्जियां ताजी रहने का दावा 

मेहरासर चाचेरा के सरकारी सैकंडरी स्कूल के तीन छात्रों ने समस्या से समझौता नहीं किया। उसका समाधान ढूंढा। गांव के स्कूल में पोषाहार की सब्जी अक्सर खराब आती या रखे-रखे सड़ जाती थीं। वे यह सब्जी खा नहीं पाते। भूखे रह जाते थे और सब्जी को फेंकना पड़ता। पोषाहार पकाने वालों की भी दिक्कत थी। वे सब्जियां रखने के लिए फ्रीज नहीं ला सकते। अब इन्होंने ऐसा फ्रीज बना लिया है जिसके लिए बिजली क्या, दूसरी भी किसी तरह की ऊर्जा की जरूरत नहीं। इनका यह प्रोजेक्ट राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के लिए चुना गया है।
स्कूल की कक्षा नौ के विद्यार्थी सुभाष बुगालिया की जिज्ञासा जब परिणाम तक पहुंची, तो यह मॉडल तैयार हो गया। बुगालिया ने साइंस टीचर सुनीता शर्मा से अपनी जिज्ञासा पर चर्चा की। स्कूल के ही दो साथी अरविंद पारीक व पवन पारीक के सहयोग से यह प्रोजेक्ट तैयार किया। प्रधानाध्यापक हरजीराम भांभू ने बताया कि बिना बिजली व ऊर्जा के चलने वाले फ्रीज में तीन सप्ताह तक फल व सब्जियां ताजी रहती हैं। छात्रों के इस प्रोजेक्ट का चयन पहले जिलास्तर पर हुआ। फिर कोटा में राज्यस्तरीय विज्ञान कांग्रेस सम्मेलन में भी इसे खूब सराहा गया।
ऐसे हुआ खाका तैयार
टीचर सुनीता के अनुसार उनके स्कूल में पोषाहार प्रभारी शिक्षक सब्जी लेकर देर से आते थे। छात्र सुभाष ने एक दिन कहा कि मैडम स्कूल में एक साथ सब्जी लाकर रख दें। तब इस समस्या का समाधान हो सकता है। टीचर ने कहा कि एक साथ सब्जी लाने पर वह खराब हो जाएगी। छात्र ने पूछा स्कूल को फ्रीज नहीं मिल सकता? उसने कहा स्कूल के लिए फ्रीज मिलना थोड़ा मुश्किल है। तब अड़मालसर गांव से दो किमी दूर स्कूल आने वाले इस छात्र सुभाष ने कहा कि मैडम हमारे घरों में कई बार नींबू को खराब होने से बचाने के लिए गिली मिट्टी में दबाते हैं। टीचर ने छात्र की बात पर मनन किया। नेट पर पर काफी सर्च किया। इसमें गुजरात के एक व्यक्ति के मिट्टी का फ्रीज बनाने की जानकारी थी। अगले दिन उसने सुभाष को इस थीम के बारे में बताया। इस प्रकार के फ्रीज का प्रोजेक्ट तैयार करने को प्रेरित किया।
स्कूल में होनहारों का अभिनंदन
mehrasarमेहरासर चाचेरा के रामावि में शनिवार को हुए समारोह में बिना बिजली के फ्रीज का प्रोजेक्ट बनाने वाले विद्यार्थियों और अध्यापिका को सम्मानित किया गया। उक्त प्रोजेक्ट का राष्ट्रीय स्तर पर चयन होने पर स्कूल प्रशासन ने बाल वैज्ञानिक सुभाष बुगालिया, अरविंद पारीक, पवन पारीक व गाईड विज्ञान की अध्यापिका सुनीता शर्मा का शनिवार को सम्मानित किया गया। प्रधानाध्यापक हरजीराम भांभू ने बताया कि यह फ्रीज सस्ता, व्यावहारिक व उपयोग में आसान है। उन्होंने बताया कि जिन गांवों में बिजली की कमी रहती है, उनमें यह फ्रीज बहुत उपयोगी साबित हो सकता है। स्कूल के विद्यार्थी इसका प्रचार प्रसार भी करेंगे। प्रोजेक्ट को तैयार करने वाले छात्रों और स्कूल दल को 25 से 27 दिसंबत तक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी में होने वाली राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भेजा जाएगा।
Categories: समाचार

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